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दीक्षांत समारोह में मंत्री विपुल गोयल ने छात्राओं को दिया संदेश - डिग्री अंत नहीं, एक नई शुरुआत

Posted by : pramod goyal on : Tuesday, 7 April 2026 0 comments
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 हरियाणा के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने आज महाराजा अग्रसेन एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा आयोजित दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए छात्राओं को संबोधित किया। अपने ओजस्वी और प्रेरणादायक उद्बोधन में उन्होंने कहा कि आज का यह दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धि का उत्सव नहीं बल्कि जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत है जहां से जिम्मेदारियों नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण की वास्तविक यात्रा आरंभ होती है।

उन्होंने कहा कि छात्राओं के हाथ में आई डिग्री केवल एक प्रमाण पत्र नहीं बल्कि उनके वर्षों के कठिन परिश्रम माता पिता के त्याग और गुरुओं के मार्गदर्शन का साकार रूप है। यह वह आधारशिला है जिस पर वे अपने उज्ज्वल भविष्य के साथ साथ देश के विकास की नई इमारत खड़ी करेंगी।

मंत्री विपुल गोयल ने महाराजा अग्रसेन के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक रुपया एक ईंट का सिद्धांत आज भी सामाजिक समरसता समानता और सहयोग की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश की नीतियों में इन्हीं मूल्यों की झलक दिखाई देती है जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का कार्य कर रही हैं।
उन्होंने नारी शिक्षा के महत्व पर विशेष बल देते हुए कहा कि जब एक महिला शिक्षित होती है तो वह केवल अपने जीवन को नहीं बदलती बल्कि पूरे परिवार समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि आज भारत की बेटियां हर क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही हैं चाहे वह विज्ञान और तकनीक हो रक्षा सेवाएं हों प्रशासनिक क्षेत्र हो या उद्यमिता का क्षेत्र।

मंत्री विपुल गोयल आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2014-15 में जहां लगभग 1.57 करोड़ बेटियां उच्च शिक्षा में थीं वहीं आज यह संख्या बढ़कर लगभग 2.07 करोड़ से अधिक हो चुकी है जो करीब 32 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है। STEM क्षेत्रों में महिलाओं की लगभग 43 प्रतिशत भागीदारी यह प्रमाणित करती है कि भारत की बेटियां अब केवल भागीदारी नहीं बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। स्कूल शिक्षा में भी बेटियों का नामांकन लगातार बढ़ा है और ड्रॉपआउट दर में कमी आई है जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है।
उन्होंने कहा कि आज का भारत अवसरों आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का भारत है जहां डिजिटल क्रांति स्टार्टअप संस्कृति और नई शिक्षा नीति ने युवाओं को नई दिशा दी है। गांवों से निकलकर स्टार्टअप्स का उभरना और वैश्विक मंच पर भारतीय युवाओं की बढ़ती भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि देश तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है।

इस अवसर पर मंत्री विपुल गोयल ने नारी सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम केवल एक कानून नहीं बल्कि देश की आधी आबादी को समान अवसर और सम्मान देने की मजबूत प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इसके माध्यम से संसद और विधानसभा

ओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है जिससे आने वाले समय में निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी और अधिक सशक्त होगी।

उन्होंने कहा कि जब शिक्षित बेटियां नीति निर्माण और नेतृत्व के केंद्र में पहुंचेंगी तो देश की दिशा और गति दोनों में व्यापक और सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा। यह अधिनियम भारत के लोकतंत्र को और अधिक समावेशी संतुलित और मजबूत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।

मंत्री ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का भारत उन्हें केवल शिक्षा का अवसर नहीं दे रहा बल्कि नेतृत्व करने और बदलाव लाने का अवसर भी दे रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान कौशल और आत्मविश्वास का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान दें।
उन्होंने युवाओं से कहा कि देश को आज केवल राजनीति नहीं बल्कि राष्ट्रनीति की आवश्यकता है। Nation First Party Next Self Last का मूल मंत्र अपनाकर ही हम एक सशक्त और विकसित भारत का निर्माण कर सकते हैं।

मंत्री विपुल गोयल ने यह भी कहा कि सफलता के साथ संस्कारों का संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि जहां भी जाएं अपनी जड़ों अपने मूल्यों और अपने सामाजिक दायित्व को कभी न भूलें। सच्ची सफलता वही है जिसमें समाज के प्रति समर्पण और सेवा का भाव समाहित हो।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि छात्राओं की इस उपलब्धि के पीछे उनका त्याग समर्पण और मार्गदर्शन ही सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने सभी छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे अपने ज्ञान संस्कार और संकल्प के बल पर आत्मनिर्भर सशक्त और गौरवशाली भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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