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ग व्हॉट्सएप/सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑडियो य़ा वीडियो कॉल करते है। जिसमें वह लोगों को मनी लॉड्रिंग, आतंकवादी गतिविधियों, ह्यूमन ट्रैफिकिंग, एनडीपीएस जैसे गैर कानूनी कार्यो में शामिल होना बतलाते है। फिर कथित मामले को जांच एजेंसी जैसे क्राइम ब्रांच, ATS, पुलिस आदि या आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ED) या फिर CBI को ट्रांसफर करने के बारे बोलते है। इसके उपरांत एक अंजान नंबर से लोगो के पास वीडियों कॉल आती है। जिसमें ठग पुलिस की वर्दी पहनकर क्राईम ब्रांच, ATS या प्रवर्तन निदेशालय(ED) या CBI या आयकर अधिकारी बनकर बात करते है और फिर मनी लॉड्रिंग, आतंकवादी गतिविधियों या ह्यूमन ट्रैफिकिंग या एनडीपीएस जैसे मामलों में शामिल होने का भय दिखाते हैं या फिर कोर्ट का फर्जी नोटिस भेजते हैं और फिर लोगों को डिजिटल अरेस्ट करने बारे बोलते हैं। ठ
गों द्वारा कमरे या घर से बाहर न जाने और किसी भी व्यक्ति से संपर्क करने के लिये मना किया जाता है और जब पीडित डर जाता है तो ठगों द्वारा उसके खाता या फिक्स डिपोजिट(FD) में जमा रुपयों को स्क्रूटनी करने के बहाने से अलग-अलग खाता में ट्रांसफर करवा लेते है या फिर मामले को निपटाने के लिए पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
*बचाव*
1. डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नही होती है। किसी भी भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट का कोई भी प्रावधान नही है।
2. कोई भी लॉ इंफोर्समेंट एजेंसी किसी भी व्यक्ति को विडियों कॉल के जरिये अरेस्ट नही करती है।
3. कोई भी लॉ इंफोर्समेंट एजेंसी खाता या फिक्स डिपोजिट(FD) की स्क्रूटनी के लिये अलग-अलग खाता में पैसे ट्रांसफर नही करवाती है।
4. संदिग्ध कॉल प्राप्त होने पर तुरंत कॉल काट दें और अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्पलाइन (1930) या https://cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
5.अपने परिवार के सदस्य, मित्र व जानकारी के साथ घटना को तुरंत सांझा करें। *भयभीत ना होंवे*

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