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गुरुग्राम, 1 अप्रैल 2026
देश की नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार नए लेबर कोड्स के खिलाफ़ आज ट्रेड यूनियन काउंसिल, गुरुग्राम के आह्वान पर “काला दिवस” मनाते हुए जिला उपायुक्त कार्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में मजदूरों, कर्मचारियों और विभिन्न ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर सरकार की नीतियों के खिलाफ़ अपना आक्रोश प्रकट किया।
इस विरोध प्रदर्शन में एटक, सीटू, एचएमएस, एआईयूटीयूसी, इंटक व सर्व कर्मचारी संघ सहित अनेक श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम की अध्यक्षता संयुक्त रूप से की गई जिसमें एटक से बलवीर कंबोज, हिंद मजदूर सभा से जसपाल राणा, इंटक से मुकेश शर्मा, ए आई यू टी यू सी से श्रवण कुमार गुप्ता, सीटू से सुरेश नोरा ने की संचालन अनिल पवार द्वारा किया गया।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नए लेबर कोड्स मजदूर वर्ग के लंबे संघर्षों से हासिल किए गए अधिकारों को खत्म करने की दिशा में उठाया गया कदम हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कानूनों के लागू होने से यूनियन बनाने और हड़ताल करने के अधिकारों को जटिल और कमजोर किया जा रहा है, जिससे मजदूरों की आवाज़ दबाई जा सके।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और स्थायी रोजगार जैसी बुनियादी अवधारणाओं को कमजोर किया जा रहा है। ठेका प्रथा को बढ़ावा देकर स्थायी नौकरियों को खत्म करने की साजिश की जा रही है, जिससे मजदूरों की नौकरी असुरक्षित हो जाएगी।
काम के घंटों के मुद्दे पर भी वक्ताओं ने चिंता व्यक्त करते
हुए कहा कि नए प्रावधानों के तहत मालिकों को अधिक छूट दी जा रही है, जिससे मजदूरों से 10 से 12 या उससे भी अधिक घंटे काम कराया जा सकता है। इससे मजदूरों का शारीरिक और मानसिक शोषण बढ़ेगा और उनके जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ेगा।
हुए कहा कि नए प्रावधानों के तहत मालिकों को अधिक छूट दी जा रही है, जिससे मजदूरों से 10 से 12 या उससे भी अधिक घंटे काम कराया जा सकता है। इससे मजदूरों का शारीरिक और मानसिक शोषण बढ़ेगा और उनके जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ेगा।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि “Ease of Doing Business” के नाम पर सरकार पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए श्रम कानूनों को कमजोर कर रही है, ताकि मजदूरों के शोषण में कोई बाधा न रहे। उन्होंने कहा कि यह नीतियां देश के लोकतांत्रिक ढांचे और मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला हैं।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने उड़ीसा के क्योंझर जिले में किसान आंदोलन के नेता प्रकाश मल्लिक की बीती रात की गई गिरफ्तारी की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि किसान और मजदूर नेताओं को इस प्रकार गिरफ्तार करना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है और सरकार की दमनकारी नीति को दर्शाता है। वक्ताओं ने प्रकाश मल्लिक की तत्काल रिहाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए सरकार से मांग की कि इन जनविरोधी लेबर कोड्स को तुरंत वापस लिया जाए और मजदूरों के हित में मजबूत श्रम कानून लागू किए जाएं। साथ ही, सभी मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन की गारंटी, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार और स्थायी रोजगार सुनिश्चित किया जाए।
वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन कानूनों को वापस नहीं लिया तो आने वाले समय में देशव्यापी स्तर पर और व्यापक व निर्णायक आंदोलन चलाए जाएंगे, जिनकी जिम्मेदारी पूरी तरह सरकार की होगी।
प्रदर्शन के अंत में सभी संगठनों ने एकजुट होकर संघर्ष को तेज करने और मजदूर वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए लगातार आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया। प्रदर्शन को संबोधित करने वालों में जसपाल राणा, श्रवण कुमार गुप्ता, बलवीर कंबोज, मुकेश शर्मा, ऊषा सरोहा, अनीता यादव, रामकुमार, सुशील कुमार, धर्मेन्द्र, मीरा, सरस्वती, सुरेश सोलकी, परवीन जांगड़ा, वजीर कुमार, बलवान सिंह, सोमदत =चंदन, राजू, एस एन दहिया आदि

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