फरीदाबाद जिले के सिविल अस्पताल में एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक छह महीने में जन्मी प्रीमेच्योर बच्ची को ऑक्सीजन देने में कथित लापरवाही बरती गई। बच्ची के परिजनों का कहना है कि अस्पताल की इमरजेंसी में रखा ऑक्सीजन सिलेंडर खाली मिला और दूसरे सिलेंडर की व्यवस्था करने में करीब 20 से 25 मिनट का समय लग गया।
इस दौरान अस्पताल का कोई कर्मचारी मदद के लिए सामने नहीं आया।
नगला डबुआ के रंजीत ने बताया कि उनकी चाची की करीब चार से आठ दिन पहले ही छह महीने में प्रीमेच्योर बच्ची हुई थी। बच्ची के जन्म के बाद उसे तुरंत इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, क्योंकि वह पूरी तरह विकसित नहीं थी और उसे विशेष देखभाल की जरूरत थी, लेकिन निजी अस्पताल में इलाज का खर्च काफी ज्यादा होने के कारण परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ता चला गया।
रंजीत ने बताया कि निजी अस्पताल में कुछ दिन इलाज चलने के बाद डॉक्टरों ने बच्ची और उसकी मां को दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। परिवार ने वहां भी इलाज शुरू करवाया, लेकिन वहां का खर्च भी काफी अधिक था। ऐसे में मजबूरी में परिवार ने बच्ची की मां को तो डिस्चार्ज करवा लिया, लेकिन बच्ची को अस्पताल में रखने के लिए भी भारी रकम मांगी जा रही थी, जिसे परिवार के लिए वहन करना मुश्किल हो गया।
इसी दौरान किसी परिचित से उन्हें जानकारी मिली कि फरीदाबाद के सिविल अस्पताल में प्रीमेच्योर बच्चों के लिए विशेष केयर सेंटर की सुविधा उपलब्ध है। इसके बाद परिवार ने बच्ची को सिविल अस्पताल ले जाने का फैसला किया। सोमवार की शाम के समय निजी अस्पताल की एंबुलेंस से बच्ची को सिविल अस्पताल लाया गया।
परिजनों के अनुसार जब वे सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे, तो बच्ची को पहली मंजिल पर स्थित वार्ड में ले जाने के लिए छोटे ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत पड़ी।
अस्पताल स्टाफ ने इमरजेंसी से एक छोटा ऑक्सीजन सिलेंडर लाकर दिया, लेकिन जब उसे बच्ची को लगाने की कोशिश की गई, तो पता चला कि सिलेंडर में ऑक्सीजन ही नहीं है और वह पूरी तरह खाली है। इस स्थिति से परिजन घबरा गए। उन्होंने तुरंत अस्पताल स्टाफ से दूसरा सिलेंडर लाने के लिए कहा, लेकिन काफी देर तक कोई व्यवस्था नहीं हो पाई।
रंजीत का आरोप है कि छोटे ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए करीब 20 से 25 मिनट तक इमरजेंसी गेट पर ही इंतजार करना पड़ा। इस दौरान जब स्टोर रूम से सिलेंडर लाने की बात कही गई, तो वहां ताला लगा हुआ था और कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। परिजनों का कहना है कि इस दौरान अस्पताल का कोई भी कर्मचारी सक्रिय रूप से मदद के लिए सामने नहीं आया।
आखिरकार जिस निजी अस्पताल की एंबुलेंस से बच्ची को सिविल अस्पताल लाया गया था, उसी एंबुलेंस के स्टाफ ने तुरंत पहल की।
एंबुलेंस में मौजूद ऑक्सीजन सिलेंडर को निकाला और बच्ची को लगाया। इसके बाद उसी सिलेंडर के सहारे बच्ची को पहली मंजिल तक ले जाया गया। रंजीत ने कहा कि निजी अस्पताल के एंबुलेंस स्टाफ ने समय पर मदद करके बड़ी इंसानियत दिखाई, जिसके लिए परिवार उनका आभारी है। उन्होंने कहा कि अगर एंबुलेंस स्टाफ मदद नहीं करता तो बच्ची की हालत और भी गंभीर हो सकती थी।


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