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चंडीगढ़ : हरियाणा के चर्चित आई. डी. एफ. सी. फरुट बैंक के 590 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच को लेकर जल्द ही बड़ा घटनाक्रम सामने आ सकता है। सूत्रों के अनुसार इसी सप्ताह केंद्र से सी.बी.आई. जांच की मंजूरी मिल सकती है। करीब 10 दिन पहले हरियाणा सरकार ने सी.बी.आई. जांच के लिए पत्र लिखा था। वर्तमान में इस मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (ए.सी.बी.) कर रही है और अब तक की जांच में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं।
ए.सी.बी. नेइस मामले में 6 अधिकारियों
, जिनमें 5 आई.ए.एस. अधिकारी शामिल हैं, के खिलाफ कार्रवाई के लिए धारा 17ए के तहत सरकार से मंजूरी मांगी है। हालांकि, अभी तक सरकार ने इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। लिहाजा सी.बी.आई. जांच शुरू होने के बाद ही आई.ए.एस. अफसरों से पूछताछ की कार्रवाई हो सकती है। उच्चपदस्थ सूत्रों की मानें तो ए.सी.बी. की जांच में यह संकेत मिले हैं कि पूरा घोटाला आई.ए.एस. अफसरों की शह पर हुआ और बैंक खातों को खुलवाने में उनकी भूमिका रही है। ए.सी.बी. की पूछताछ में तीन सरकारी अधिकारियों ने वरिष्ठ अफसरों का नाम भी उजागर किया है। यही वजह है कि सरकार और जांच एजेंसी दोनों ही चाहती हैं कि मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच सीबीआई से कराई जाए, ताकि जिम्मेदारी तय हो सके।
महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि दोषी आई.ए.ए.स अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने से पहले सी.बी. आई. को धारा 17ए की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि जब राज्य सरकार खुद सी.बी.आई. जांच के लिए सिफारिश करती है तो उसमें मंजूरी देकर ही सिफारिश की जाती है। सी.बी.आई. की कार्यप्रणाली के अनुसार, जिस राज्य में किसी बड़े घोटाले की जांच की जाती है, वहां उस राज्य के कैडर के अधिकारियों को जांच टीम में शामिल नहीं किया जाता। इस नियम के तहत यदि हरियाणा में इस बैंक घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी जाती है, तो जांच टीम में हरियाणा कैडर का कोई अधिकारी नहीं होगा, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।

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