फरीदाबाद औद्योगिक नगरी में स्मार्ट पार्किंग परियोजना लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी है। करीब दो साल बीत जाने के बाद भी यह योजना धरातल पर नहीं आ सकी है। फाइलें दफ्तरों में घूमती रहीं, लेकिन कोई ठोस अमल नहीं हुआ। इस लापरवाही का सीधा असर आम लोगों पर पड़ा है। पार्किंग की सुविधा न होने के कारण लोगों को सड़कों पर ही वाहन खड़े करने पड़ते हैं, जिसके चलते भारी भरकम जुर्माना भरना पड़ रहा है।
पिछले एक वर्ष में पुलिस ने 99 हजार 272 रुपए चालान काटे हैं। रांग पार्किंग के लिए 500 रुपए प्रति चालान के हिसाब से करीब 4 करोड़ रुपये लोगों से वसूले जा चुके हैं। एनआईटी-1, एनआईटी-2, एनआईटी-5 और ओल्ड फरीदाबाद बाजार जैसे व्यस्त बाजारों में हजारों दुकानें हैं और रोजाना बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं, लेकिन वहां पार्किंग की कोई व्यवस्थित व्यवस्था नहीं है।
नतीजा यह है कि वाहन सड़कों और चौक-चौराहों तक खड़े नजर आते हैं।
नगर निगम ने पहले 16 स्थानों पर स्मार्ट पार्किंग विकसित करने की योजना बनाई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से वह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब निगम ने नई रणनीति के तहत 42 स्थान चिन्हित कर प्रस्ताव सरकार को भेजा है। इन जगहों पर पार्किंग निर्माण को लेकर अनुमति और दिशा-निर्देश मांगे गए हैं।

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