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फरीदाबाद 11 अप्रैल -
सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू )जिला कमेटी फरीदाबाद के सैकड़ो मजदूर मानेसर औद्योगिक एरिया के श्रमिकों की मांगों के समर्थन में 16 अप्रैल को जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन करेंगे। यह जानकारी सीटू के जिला प्रधान निरंतर पाराशर और जिला सचिव वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने दी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में 13 अप्रैल को जिला कमेटी का मांस डेपुटेशन डीसी फरीदाबाद से मिलकर उन्हें मांगों का ज्ञापन देगा। दोनों नेताओं ने न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी करने सहित अन्य मांगों के लिए शुरू किए गए आंदोलन का पूर्ण रूपेण समर्थन करते हुए प्रशासन के द्वारा पुलिस बल का प्रयोग करके आंदोलनकारीयों पर लाठी चार्ज करने और नाजायज गिरफ्तारी की कठोर शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार किए गए सभी 55 श्रमिकों को शीघ्र रिहा किया जाए। जिसमें महिला कर्मी भी शामिल हैं। वर्करों का दमन किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने इसे अलोकतांत्रिक बताया ।उन्होंने कहा कि मजदूरों को अपने हकों के लिए संघर्ष करने का संविधान संबंध अधिकार प्राप्त है। सरकार को इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय से मजदूरों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित किया गया है। उन्हें समय पर वेतन नहीं दिया जाता। न्यूनतम वेतन नहीं मिलने की वजह से इस बढ़ती हुई महंगाई में परिवार का पालन पोषण करना उनके लिए मुश्किल हो गया है। साल भर में केवल तीन छुट्टियां मिलती हैं। तीज त्योहार पर भी अवकाश नहीं मिलता है। श्रमिकों को 8 घंटे से अधिक काम करने पर ओवरटाइम नहीं मिलता। बगैर वेतन के अतरिक्त समय तक काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। ठेका और कैजुअल वर्करों को कंपनी में कैंटीन की सुविधा भी नहीं दी जाती है। दीपावली के त्योहार इन वर्करों को बोनस तो छोड़िए एक मिठाई का डिब्बा भी ठेकेदार से नहीं मिलता है। फैक्ट्रीयों में महिला वर्करों के लिए शौचालय तक नहीं बनाए गए। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर श्रम विभाग के अधिकारियों का रवैया ढुलमुल रहता है। उनके द्वारा मजदूरों को न्याय देने के बजाय मालिकों की तरफदारी की जाती है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने श्रमिकों के वेतन में पिछले 12 वर्षों में केवल मामूली सी वृद्धि करके पहले से प्राप्त 11257 की जगह 15200 की घोषणा की है। जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। जबकि पहले से ही दिल्ली में 18665 रुपया न्यूनतम वेतन मिल रहा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक एक समान वेतन होना चाहिए। इसकी अनदेखी की जाती है। उन्होंने सभी फैक्ट्री के मालिकों से 1 अप्रैल से न्यूनतम वेतन में की गई बढ़ोतरी को लागू करते हुए सभी श्रमिकों को इसका लाभ देने की मांग की है।

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