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फरीदाबाद झूले हादसे के अगले ही दिन, उसी मेला परिसर में पंजाबी सुपरस्टार गुरदास मान का कार्यक्रम आयोजित किया गया। विडंबना देखिए, जिस जगह कुछ घंटों पहले रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा था, वहां 15 से 20 हजार लोग तालियां बजा रहे थे। हालांकि, गुरदास मान ने मंच से अपनी गायकी के जरिए स्वर्गीय इंस्पेक्टर जगदीश को भावभीनी श्रद्धांजलि दी और माहौल कुछ पल के लिए गमगीन हुआ, लेकिन उसके तुरंत बाद शुरू हुआ सुपरहिट गानों और शोर-शराबे का सिलसिला।
सवाल अब मेला प्रशासन और नोडलअधिकारियों की नैतिकता पर है। आमतौर पर इतने बड़े हादसे के बाद शोक स्वरूप या जांच पूरी होने तक कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया जाता है। लेकिन रविवार की भारी भीड़ और राजस्व के दबाव में क्या अधिकारियों ने संवेदनाओं को ताक पर रख दिया?
हादसे वाली जगह पर ही जश्न का आयोजन करना प्रशासन की कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। क्या एक पुलिस अधिकारी की शहादत की कीमत महज एक औपचारिक शोक संदेश तक सीमित है? आखिर क्यों प्रशासन ने इस कार्यक्रम को किसी अन्य दिन के लिए टालने या स्थान बदलने की जहमत नहीं उठाई?

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