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बजट से मजदूर किसान व कर्मचारियों तथा मध्यमवर्ग को घातक निराशा - एस डी त्यागी‌

Posted by : pramod goyal on : Monday, 2 February 2026 0 comments
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 वर्ष 2026 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देशभर के मेहनतकश मजदूर किसान व कर्मचारियों तथा मध्यमवर्ग को घातक निराशा हुई है .जबकि देश की उन्नति और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका और योगदान इस वर्ग का सर्वाधिक रहता है फिर इनको हर बार उपेक्षित किया जा रहा है पूंजीवाद को पूरी तरह पोषित करने से देश पर विदेशी मुद्रा कर्ज का बोझ प्रति वर्ष बढ़ रहा है जो आने वाली युवा पीढ़ी को गुलाम और कंगाल बना कर रख देगा, सरकार देश के नागरिकों प्रति कोई संवेदना नहीं रखतीं इस लिए अधिकतर फैसले तानाशाही रवैया अपना कर लिए जा रहे हैं कोई परस्पर संवाद या सुझाव की आवश्यकता ही नहीं समझते हैं और अंध भक्तों के सहारे ही चल रहे हैं जो देश के भविष्य के लिए बहुत बेहद ख़तरनाक बीजारोपण कर रहे हैं वर्ग संघर्षों से अब बचना मुश्किल लग रहा है भारत की शक्ति हमारे सामाजिक ढांचे में ही रहीं हैं तरह तरह से षड्यंत्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं युवाओं को रोजगार उपलब्ध नहीं है नशा उपलब्ध है उन्माद पैदा कर नफरतों का मीठा जहर पीलाकर प्रेम सद्भाव सहयोग की भावनाएं लुप्त होती जा रही है . आज के प्रोढ सत्ताधारियों को तो मजे लेकर जल्द ही ऊपर चलें जाना उनके आगे पीछे भी कोई है भी नहीं उनका क्या बिगाड़े कोई आम‌‌ लोगों को पछतावा और रोना पड़ेगा युवा पीढ़ी भी खून आंसू बहा कर भुखमरी की शिकार बन रही है बुढ़ापे में लोगों की आत्मा रो रही है उनकी पेंशन योजना छीनीं जा रही है इन राजनीतिक गुंडों से कोई पूछने वाला है कि बुजुर्ग लोगो को पेंशन स्कीम योजना लाकर सम्मानित किया अब वापस छीनकर अपमानीत कर रहे हों इसी तरह सेवा निवृत्त पेंशन स्कीम योजना को मज़ाक बना दिया सभी नेताओं ने मंत्रीयो ने अपनी पेंशन और अन्य भत्ते साधन सुविधा तो बढ़ा ली है और नागरिको के सभी अधिकारी छीन रहे हैं अपने कितनी पीढ़ियों को  पाप भुगतान करने के लिए लूट-खसोट में लगे हो इनकी आत्मा मर चुकी है विवेक को इनके स्वार्थ ने खा लिया है 2029 के चुनावों की तैयारी कर लो इस जाती धर्म क्षेत्र सम्प्रदाय लोभ लालच छोड़ सभी को बदलना है धुल चटानी है जय जवान जय किसान जय मजदूर ये तीनों घटक ही मिल कर देश और समाज को बजाने की जिम्मेदारी लेनी होगी अपनी वोट की चोट देकर ‌लूटरो को भगाना होगा और जो जातीगत आधार छेत्रीय पार्टी मोलभाव कर के नागरिकों वोटरो के विरूद्ध जाती रही है उनका भी सफाया कर ना‌ है देश में दो ही विकल्प होना चाहिए पक्ष और विपक्ष तो भारत पुनः भारतवर्ष स्थापित किया जा सकता है वरना ये काले अंग्रेज हमारे बच्चों को गुलाम बना सकते हैं आप देख रहे हो राजनेता, मिडिया , न्याय पालिका, कार्य पालिका, लोकतंत्र के चारों स्तम्भ आपस साठ गांठ करके देश को लूटने में लगे हुए हैं अगर सबसे पहले पीलर स्तम्भ सरकार शासकों को बदलना आवश्यक है फिर सभी को जनता सब को सही रास्ते पर ले आयेगी।  


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