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जनआंदोलन, अनशन और संघर्ष की सशक्त मिसाल हैं समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी

Posted by : pramod goyal on : Friday, 23 January 2026 0 comments
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 कुशीनगर, तमकुहीराज।*

तमकुहीराज विधानसभा क्षेत्र में जनहित के लिए लड़े गए ऐतिहासिक आंदोलनों की श्रृंखला में मठिया श्रीराम निवासी वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी का नाम आज एक मजबूत मिसाल के रूप में दर्ज हो चुका है। वर्षों से जर्जर पड़े तमकुहीराज सिसवा अहिरौलीदान मुख्य मार्ग के निर्माण की मांग को लेकर उन्होंने भूलिया बाजार में लगभग दो माह तक अनशन व आंदोलन किया और प्रशासन व सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया।
 यह आंदोलन केवल सड़क निर्माण की मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह जनभावनाओं, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक संघर्ष की सशक्त आवाज़ बनकर उभरा। आंदोलन के दौरान डॉ. तिवारी पर दो मुकदमे दर्ज किए गए तथा उन्हें 16 दिन तक देवरिया सेंट्रल जेल में निरुद्ध रखा गया, इसके बावजूद उन्होंने जनहित से पीछे हटने से स्पष्ट इनकार कर दिया।

*अनशनकारी के रूप में बनी डॉ. मोहन तिवारी की अलग पहचान*

अनशनकारी डॉ. मोहन तिवारी की पहचान केवल नाम से नहीं, बल्कि संघर्ष, दृढ़ता और कर्मठता से बनी है। सड़क से लेकर जेल तक का संघर्ष उनके लिए नया नहीं रहा। तमकुहीराज क्षेत्र में उनका 56 दिनों का अनशन आंदोलन जनचर्चा का विषय बना रहा। इसके परिणामस्वरूप सरकार पर जबरदस्त दबाव बना, सड़क का टेंडर हुआ, वित्तीय स्वीकृति मिली और करोड़ों रुपये की लागत से सड़क का निर्माण पूरा हुआ।

*शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं के लिए सतत संघर्ष*

अनशनकारी डॉ. मोहन तिवारी ने अपने ग्रामसभा मठिया श्रीराम में जनसमस्याओं को लेकर कई बार अनशन किया। विशेष रूप से पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज में वर्षों से बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर उन्होंने आंदोलन किया, जिसके फलस्वरूप छात्रों और शिक्षकों के लिए नल-जल व्यवस्था बहाल कराई गई। इसके अतिरिक्त आंगनबाड़ी, राशन वितरण, स्वास्थ्य सुविधाओं समेत कई मुद्दों पर प्रशासन से ठोस कार्रवाई सुनिश्चित कराई।

*दिल्ली-एनसीआर और कोरोना काल में भी उल्लेखनीय जनसेवा*

समाजसेवी डॉ. तिवारी ने दिल्ली-एनसीआर फरीदाबाद में भी पत्रकारिता हितों और सामाजिक मुद्दों को लेकर अनशन किया, जहां संबंधित अधिकारियों ने उनकी मांगों को स्वीकार किया। कोरोना काल में उन्होंने प्रवासी मजदूरों की सहायता, राशन व दवा वितरण, जरूरतमंदों को अस्पताल पहुंचाने के साथ-साथ आर टी आई के माध्यम से सरकारी फंड के खुलासे कर प्रशासनिक जवाबदेही तय की।

*समाजसेवा के विविध आयाम और उपलब्धियाँ*


समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी द्वारा अब तक एक हजार से अधिक पौधारोपण, एक हजार से अधिक संविधान प्रतियों का वितरण, जरूरतमंदों को अस्पताल, दवा व राशन सहायता, निरंतर सामाजिक एवं नागरिक जागरूकता अभियान, जैसे अनेक कार्य किए जा चुके हैं। इन उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों के लिए उन्हें राष्ट्रीय रत्न अवार्ड, हरियाणा गौरव अवार्ड, फरीदाबाद गौरव अवार्ड, मीडिया पर्सनालिटी अवार्ड, प्रकृति गौरव सम्मान, नागरिक सम्मान समारोह 2024 सहित दर्जनों सम्मानों से नवाजा गया है। उन्हें हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्रियों, कमिश्नर रैंक अधिकारियों एवं अनेक गणमान्य व्यक्तियों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।

*बदलता राजनीतिक परिदृश्य और जनआंदोलन का अवसान*

जब आंदोलन के दौरान अनशनकारी डॉ. मोहन तिवारी को जेल में रखा गया, तब जिले के किसी भी बड़े राजनीतिक चेहरे ने उनके समर्थन में आवाज़ नहीं उठाई। इसके बाद क्षेत्र में जनआंदोलन धीरे-धीरे समापन की ओर बढ़ता चला गया। आज तमकुहीराज की राजनीति में धनबल, संसाधन और दिखावे का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है, जबकि जनआंदोलन इतिहास के पन्नों में सिमटते नजर आ रहे हैं।

*इतिहास बन चुका जनसंघर्ष*

अनशनकारी डॉ. मोहन तिवारी का आंदोलन यह सिद्ध करता है कि एक अकेला जनसेवक भी सत्ता को आईना दिखा सकता है। तमकुहीराज सिसवा अहिरौलीदान मुख्य मार्ग पर स्थित अनशन स्थल आज भी मोहन तिवारी आंदोलन स्थल के नाम से जाना जाता है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष, साहस और जनहित की प्रेरणा बना रहेगा।

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