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फरीदाबाद, 1 दिसम्बर। अखिल भारतीय कोली समाज (रजि.) की हरियाणा प्रदेश की कार्यकारिणी द्वारा वीरांगना झलकारी बाई के जन्मोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर डबुआ कालोनी स्थित कार्यालय पर कोली समाज के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश नेताजी ने वीरांगना झलकारी बाई जी के चित्र पर पुष्प अर्पित किए।
उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए जगदीश नेताजी ने वीरांगना झलकारी बाई जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वीरांगना झलकारी बाई काजन्म 22 नवंबर 1830 को झांसी के पास भोजला गांव में एक गरीब कोली परिवार में हुआ था। वह बचपन से ही साहसी थीं और घुड़सवारी और हथियार चलाने में निपुण थीं, जिन्हें उनके पिता ने एक लडक़े की तरह पाला था। वह रानी लक्ष्मीबाई की सेना में एक सैनिक और सलाहकार बनीं और 1857 के विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रानी लक्ष्मीबाई की हमशक्ल होने के कारण, वह दुश्मन को भ्रमित करने के लिए अक्सर रानी के वेश में युद्ध करती थीं। अप्रैल 1858 में एक खूनी युद्ध में उन्होंने ब्रिटिश सेना से बहादुरी से लड़ाई की और वीरगति को प्राप्त हुईं। भारत सरकार ने उनके सम्मान में 2001 में एक डाक टिकट जारी किया।
राजस्थान के अजमेर में उनकी प्रतिमा और स्मारक है तथा आगरा में भी उनके सम्मान में एक प्रतिमा स्थापित की गई है। लखनऊ के सबसे पुराने महिला अस्पताल में से एक का नाम बदलकर वीरांगना झलकारी बाई अस्पताल कर दिया गया है।
इस अवसर पर कोली समाज के युवा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत कोली, शिक्षाविद् मनोज कोली, समाजसेवी योगेश कोली, गजेंद्र कोली, देवीशरण, आशाराम, समाजसेवी मनोज शेरपुरिया, समाजसेवी यशवंत मौर्य, विनोद कुमार आदि ने वीरांगना झलकारी बाई जी को याद करते हुए पुष्प अर्पित किए ।

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