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फरीदाबाद,8 दिसंबर।
आशा वर्कर्स एंड फैसिलिटेटर फेडरेशन के आह्वान पर सैकड़ों की संख्या में आशाओं ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार को केंद्रीय राज्य मंत्री
कृष्ण कुमार गुर्जर के कार्यलय पर प्रदर्शन किया। जिसकी अध्यक्षता जिला अध्यक्षता जिला प्रधान हेमलता ने की और संचालन राज्य उपाध्यक्ष सुधा ने किया । प्रदर्शन के बाद आशाओं की मांगों का ज्ञापन मंत्री के निजी सचिव को सौंपा गया। प्रदर्शन में पलवल, नूंह (मेवात) गुरुग्राम व फरीदाबाद जिले की आशाओं व फैसिलिटेटर ने भाग लिया। प्रदर्शनकारी आशा वर्कर बड़खल चौंक पर एकत्रित हुई और वहां से करीब 12.30 बजे मंत्री के कार्यलय के लिए मार्च किया। मंत्री कार्यालय पर पुलिस द्वारा रोके जाने पर पुलिस व आशाओं की बीच तीखी नोंकझोंक हुई और आक्रोशित आशाओं ने मंत्री के कार्यलय के सामने सड़क पर ही पड़ाव डाल दिया और घंटों वहीं पर नारेबाजी करते हुए जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा, सीटू गुरुग्राम के प्रधान सुरेश नौहरा, नूंह के प्रधान अनिल, पलवल की प्रधान रामरती व फरीदाबाद के सचिव भी पहुंचे और आशाओं को संबोधित किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि सरकार एक तरफ पूंजीपतियों के लाखों करोड़ रुपए कर्ज व टैक्सों को माफ कर रही है लेकिन दूसरी तरफ अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य कर रही आशाओं को एनएचएम को एक स्थायी स्वास्थ्य कार्यक्रम बनाकर सरकारी कर्मचारी बनाने और 26 हजार न्यूनतम वेतन देने को तैयार नहीं है। इसलिए देशभर में आंदोलन चल रहा है और अब यह तेज होगा।
आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा की उपाध्यक्ष सुधा, मीरा, फरीदाबाद की प्रधान हेमलता, पलवल की प्रधान जगवती व सचिव सविता, मेवात की प्रधान मेहरुन्निसाव व सचिन रजनी और गुरूग्राम की प्रधान रानी प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि अगर आशाओं की मांगों की अनदेखी की आशा देशभर में आंदोलन तेज करने पर मजबूर होंगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई पॉलिसी के अनुसार आशा वर्कर्स को वालंटियर के रूप में कार्य करते हुए 20 वर्ष पूरे हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों को सुधारने और क्रोना महामारी में वोलंटियर कहीं जाने वाली आशा वर्कर्स ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी में आशाओं की महत्वपूर्ण भूमिका के लिए WHO ने आशाओं को ग्लोबल हेल्थ लीडर के अवार्ड से सम्मानित किया है। परंतु केंद्र और राज्य सरकार आशा वर्कर्स के महत्वपूर्ण कार्यों को अनदेखा कर रही है । लंबे समय से केंद्र सरकार द्वारा आशा वर्कर्स के मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है । केंद्र और राज्य सरकार मिलकर आशा वर्कर के काम को बढ़ा रही है । आशा वर्कर्स पर बिना संसाधन और बिना प्रोत्साहन राशि दिए अनेक तरह के ऐप में ऑनलाइन काम करने का दबाव बना रही है। केंद्र और राज्य सरकार के बढ़ते कामों की वजह से तमाम आशा वर्कर्स परेशान है। पिछले 12 वर्ष से केंद्र सरकार ने आशाओं के इंसेंटिव बेस कार्यों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। आशा वर्कर्स लंबे समय से सरकार से प्रोत्साहन राशियों को बढ़ाने की मांग कर रही है।
पिछले बजट स्तर में केंद्र सरकार ने संसद में आशाओं की प्रोत्साहन राशियों में ₹1500 पर महीने बढ़ाने की घोषणा की है परंतु सरकार उसे घोषणा को लागू नहीं कर रही है प्रदेश की तमाम आशा वर्कर्स केंद्र और राज्य सरकार से मांग करती है कि तुरंत आशाओं की मांगों का समाधान किया जाए।
आशाओं की मुख्य मांगें :-
1) वर्ष 2023 में 73 दिन की हड़ताल का बकाया मानदेय हरियाणा सरकार द्वारा तुरंत दिया जाए ।
2) आशा वर्करों को पक्का कर्मचारी बनाया जाए, जब तक पक्का कर्मचारी नहीं बनाया जाता तब तक 26000 रुपए न्यूनतम वेतन सहित तमाम सुरक्षा सामाजिक सुरक्षा लाभ दिए जाएं।
3) केंद्र सरकार द्वारा₹1500 की बढ़ोतरी की घोषणा को तुरंत लागू किया जाए।
4) आशाओं का रिटायरमेंट लाभ बढ़ाया जाए और आशा वर्कों को सरकारी बैंकों में बैंक लोन की सुविधा दी जाए।
5) सरकारी स्वास्थ्य के ढांचे को मजबूत किया जाए और एनएचएम को स्थाई बनाकर जनता को बेहतर सुविधाएं दी जाए ।
6) सभी तरह के ऑनलाइन अप में काम करने के लिए आशाओं को अलग से मानदेय और संसाधन उपलब्ध कराये जाए।
7) मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए ।


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