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ऑनलाइन ट्रांसफर पालिसी और परमाणु विधेयक के खिलाफ बिजली कर्मचारियों ने किया विरोध प्रदर्शन

Posted by : pramod goyal on : Friday, 26 December 2025 0 comments
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 फरीदाबाद,23 दिसंबर।


इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशनज वर्कर यूनियन के बेनर तले मंगलवार को बिजली कर्मचारियों ने सब डिवीजन स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद मांगों का ज्ञापन उप मंडल अधिकारियों को सौंपा और चेतावनी दी कि अगर ऑनलाइन ट्रांसफर पालिसी को रद्द नहीं किया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। यूनियन के आह्वान पर ओल्ड, एनआईटी, ग्रेटर फरीदाबाद और बल्लभगढ़ डिवीजन की सब डिवीजन में विरोध प्रदर्शन किए गए। इन प्रदर्शनों को इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईईएफआई) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा,ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशनज वर्कर यूनियन के राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष शब्बीर अहमद गनी, यूनिट कमेटी के नेता करतार सिंह, मनोज जाखड़,भूपसिंह कौशिक, दिगंबर सिंह, दिनेश शर्मा,असरफ खान,वेद प्रकाश कर्दम, प्रवेश बैंसला, सुरेन्द्र शर्मा,गिरीश, संजय अत्री , रिंकू, नरेश, बीरेंद्र शर्मा, डालचंद, सुबोध कुमार, अशोक कुमार आदि नेताओं ने संबोधित किया।

इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा व एएचपीसी वर्कर यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शब्बीर अहमद गनी ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि 26 नवंबर को ऑनलाइन ट्रांसफर पालिसी के खिलाफ एसीएस पावर के पंचकूला मुख्यालय पर हजारों कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था। लेकिन उसके बावजूद इस काम को आगे बढ़ाया जा रहा है। अगर तकनीकी कर्मचारियों की ऑनलाइन ट्रांसफर होगी तो बड़े पैमाने पर एक्सीडेंट होना लाजिमी है। इसलिए तकनीकी कर्मचारियों को इस पालिसी से छूट दी जानी चाहिए। ईईएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि केंद्र सरकार ने सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) विधेयक, 2025 को लोकसभा में पारित कर दिया है। उन्होंने कहा कि 
 यह विधेयक भारत की सावधानीपूर्वक निर्मित परमाणु सुरक्षा और जवाबदेही व्यवस्था को ध्वस्त करता है तथा सबसे अधिक जोखिम वाले ऊर्जा क्षेत्र को बड़े पैमाने पर निजी और विदेशी भागीदारी के लिए खोल देता है। उन्होंने बताया कि मौजूदा परमाणु ऊर्जा अधिनियम नागरिक परमाणु गतिविधियों पर उनके रणनीतिक और विनाशकारी जोखिमों के कारण कड़ा सार्वजनिक नियंत्रण सुनिश्चित करता था। शांति विधेयक इसे लाभ-आधारित लाइसेंसिंग व्यवस्था से प्रतिस्थापित करता है, जिससे परमाणु मूल्य श्रृंखला के बड़े हिस्से निजी संचालकों के लिए खोल दिए जाते हैं। यह परमाणु संचालन के निजीकरण की दिशा में एक निर्णायक बदलाव है, जबकि इसके सभी जोखिमों का बोझ जनता और देश पर डाल दिया जाता है। इसलिए किसान, मजदूर व बिजली कर्मचारी इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं।


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