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चंडीगढ़,25 नवंबर।
केन्द्रीय ट्रेड यूनियन और कर्मचारी संघों के रा
ष्ट्रव्यापी आह्वान पर बुधवार को श्रमिक विरोधी लेबर कोड्स के खिलाफ राज्य में सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे। प्रदर्शनों में श्रमिक संगठन सीटू,एटक, इंटक, एचएमएस, एआईयूटीयूसी, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा सहित बैंक व बीमा कर्मचारियों के संगठनों के मजदूर एवं कर्मचारी शामिल होंगे। यह जानकारी देते हुए अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि इस प्रदर्शनों में मजदूरों व कर्मचारी संघों के निरंतर विरोध की अनदेखी करते हुए केंद्र सरकार ने 21 नवंबर को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी गई है। जिसके खिलाफ देशभर के करोड़ों मजदूरों और कर्मचारियों में भारी आक्रोश की लहर दौड़ गई है। उन्होंने कहा कि लेबर कोड्स मजदूरों की गुलामी का दस्तावेज है। उन्होंने बताया कि आजादी से पहले और बाद में श्रमिकों के संधर्षो के बल पर 44 श्रम कानून बनवाए गए और मजदूरों के हितों को सुरक्षित किया गया था। लेकिन सरकार ने पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए 29 श्रम कानूनों को खत्म कर चार लेबर कोड्स बनाए गए हैं। इससे कारखाना मालिकों को बड़े पैमाने पर मजदूरों की छंटनी करने के लिए सरकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। लेबर कोड्स में मजदूरों के हड़ताल और अधिकार सामूहिक सौदेबाजी के साथ साथ यूनियन बनाने के अधिकार को लगभग छीन लिया गया है। जिसके खिलाफ देशभर के मजदूरों और कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
ष्ट्रव्यापी आह्वान पर बुधवार को श्रमिक विरोधी लेबर कोड्स के खिलाफ राज्य में सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे। प्रदर्शनों में श्रमिक संगठन सीटू,एटक, इंटक, एचएमएस, एआईयूटीयूसी, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा सहित बैंक व बीमा कर्मचारियों के संगठनों के मजदूर एवं कर्मचारी शामिल होंगे। यह जानकारी देते हुए अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि इस प्रदर्शनों में मजदूरों व कर्मचारी संघों के निरंतर विरोध की अनदेखी करते हुए केंद्र सरकार ने 21 नवंबर को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी गई है। जिसके खिलाफ देशभर के करोड़ों मजदूरों और कर्मचारियों में भारी आक्रोश की लहर दौड़ गई है। उन्होंने कहा कि लेबर कोड्स मजदूरों की गुलामी का दस्तावेज है। उन्होंने बताया कि आजादी से पहले और बाद में श्रमिकों के संधर्षो के बल पर 44 श्रम कानून बनवाए गए और मजदूरों के हितों को सुरक्षित किया गया था। लेकिन सरकार ने पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए 29 श्रम कानूनों को खत्म कर चार लेबर कोड्स बनाए गए हैं। इससे कारखाना मालिकों को बड़े पैमाने पर मजदूरों की छंटनी करने के लिए सरकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। लेबर कोड्स में मजदूरों के हड़ताल और अधिकार सामूहिक सौदेबाजी के साथ साथ यूनियन बनाने के अधिकार को लगभग छीन लिया गया है। जिसके खिलाफ देशभर के मजदूरों और कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशनज वर्कर यूनियन के चेयरमैन देवेन्द्र सिंह हुड्डा, राज्य प्रधान सुरेश राठी व वरिष्ठ उपाध्यक्ष शब्बीर अहमद गनी ने बताया कि बिजली कर्मचारी लेबर कोड्स और बिजली अमेंडमेंट बिल के खिलाफ और बिजली कर्मचारियों की लंबित मांगों के समाधान के प्रति सरकार व प्रबंधन के घोर निंदनीय रवैए के खिलाफ एसीएस पावर के पंचकूला मुख्यालय पर राज्य स्तरीय विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। जिसमें प्रदेश भर से हजारों की संख्या में कर्मचारी शामिल होंगे।

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