हरियाणा पुलिस राजधानी दिल्ली में आतंकवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए जल्द ही एक आतंकवाद-रोधी प्रकोष्ठ (एंटी-टेररिस्ट सेल) स्थापित करेगी। हालांकि यह प्रस्ताव राज्य सरकार के गृह विभाग के पास लंबित था। लेकिन एक सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल (जिसमें कई डॉक्टर भी शामिल हैं) का भंडाफोड़ होने के बाद, पुलिस ने प्रकोष्ठ स्थापित करने के लिए सरकार से फिर संपर्क किया है। अब इस पर चर्चा अंतिम चरण में है।
इससे पहले हरियाणा पुलिस में आतंकवादी गतिविधियों की खुफिया जानकारी जुटाने का काम सीआईडी के पास था। लेकिन आतंकवाद-रोधी प्रकोष्ठ अब खुफिया जानकारी जुटाने के साथ-साथ ऑपरेशन और जांच भी करेगा।
पुलिस महानिदेशक (DGP) ओपी सिंह ने बताया, हमारा उद्देश्य साइबर स्पेस और भौतिक स्थानों को चिह्नित करने वाले संकेतों की जांच करना है। आतंकवाद-रोधी प्रकोष्ठ सुराग जुटाएगा, जांच करेगा और ऑपरेशन चलाएगा। फरीदाबाद से भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद होने और दिल्ली में लाल किले के पास हुए विस्फोट के बाद, डीजीपी ने हरियाणा पुलिस के अधिकारियों और उत्तर प्रदेश पुलिस और दिल्ली पुलिस के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की थी। चूंकि दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी ऐसी ही इकाइयां कार्यरत हैं, इसलिए हरियाणा के डीजीपी ने आतंकवाद-रोधी प्रकोष्ठ के गठन में तेजी लाई।
ओपी सिंह ने बताया, हमारा ध्यान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) पर रहेगा। हरियाणा के 14 जिले एनसीआर में आते हैं, जिनमें फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत और झज्जर शामिल हैं। एनसीआर में 150 से ज्यादा पुलिस स्टेशन हैं और आमतौर पर हर थाने में दो सुरक्षा एजेंट तैनात होते हैं। हमने हर थाने से एक सुरक्षा एजेंट को आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाने के लिए तैनात करने का फैसला किया है। ये सुरक्षा एजेंट आगे एक वरिष्ठ अधिकारी को रिपोर्ट करेंगे जो उन्हें हर सुबह काम सौंपेंगे। डीजीपी ने आगे कहा, ऑपरेशन के लिए हमारे पास 500 कमांडो हैं।

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