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मीडिया विभाग द्वारा दो दिवसीय सोशल मीडिया उद्यमिता कार्यशाला का शुभारंभ

Posted by : pramod goyal on : Wednesday, 3 September 2025 0 comments
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 फरीदाबाद, 03 सितंबर। जे.सी. बोस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के संचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी विभाग ने पब्लिक मीडिया टेक फाउंडेशन के सहयोग से 'सोशल मीडिया उद्यमिता' पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में विशेषज्ञ शलभ उपाध्याय और शिक्षक, लेखक, विचारक देवेश खंडेलवाल शामिल हुए। कुलगुरु


प्रो.सुशील कुमार तोमर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर डीन अकादमिक प्रो.मुनीश वशिष्ठ, डीन डॉ.अनुराधा शर्मा, विभागाध्यक्ष प्रो.पवन सिंह ने अपने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर विषय विशेषज्ञ, विभिन्न शिक्षण संस्थानों की फैकल्टी एवं विद्यार्थी दो दिन तक विभिन्न सत्रों में सोशल मीडिया मार्केटिंग, कंटेंट क्रिएशन, डिजिटल ब्रांडिंग और उद्यमिता से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा करेंगे।

कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो.पवन सिंह ने सभी अतिथियों को पुस्तक एवं पौधा भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने अपने स्वागत उद्बोधन के दौरान कहा कि सोशल मीडिया हमारे जीवन का उद्देश्य नहीं है बल्कि भविष्य में हम जो चाहते हैं उसे प्राप्त करने का एक बेहतर विकल्प है। यह एक शक्तिशाली माध्यम है। डीन अकादमिक प्रो.मुनीश वशिष्ठ ने कार्यशाला की प्रासंगिकता पर जोर देते हुए कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य केवल सिद्धांत तक सीमित नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर भी रहेगा जो विद्यार्थियों को सोशल मीडिया को एक व्यावहारिक करियर पथ के रूप में अपनाने के लिए सशक्त बनाएगा।
मुख्य वक्ता एवं न्यूज के संस्थापक शलभ उपाध्याय ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को आशावाद के साथ चुनौतियों को स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि असफलता को गले लगाना ही जीवन की सफलता है। इसलिए असफलताओं से डरें नहीं उनका सामना करें, उसका आनंद लें। यही जीत का आधार है। फिर उन्होंने मीडिया को मूल कहानीकार के रूप में वर्णित किया और कहानीकारों को पोषित करने के पब्लिक मीडिया टेक फाउंडेशन के दृष्टिकोण को रेखांकित किया। कहानीकारों का समर्थन करते हुए कहा कि अपनी कहानी स्वयं बताएं।
लेखक एवं विचारक देवेश खंडेलवाल ने उपस्थित प्रतिभागियों को विचार एवं विमर्श के संदर्भ में कई प्रसंग सुनाते हुए कहा कि हमें किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच करनी चाहिए। डिजिटल युग में सोशल मीडिया एक शक्तिशाली उपकरण है इसका सही दिशा में प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी किताबों का संग्रह रखे। अख़बारों का संपादकीय पेज और लेटर टू एडिटर अवश्य पढ़ें। छात्रों को गीता प्रेस: द मेकिंग ऑफ हिंदू नेशन और अकबर द ग्रेट बाय विंसेंट आर्थर स्मिथ जैसे प्रामाणिक स्रोतों जैसे किताबों के माध्यम से उन्हें सत्यापित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

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