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फरीदाबाद।
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने मुख्यमंत्री द्वारा एलटीसी, महंगाई भत्ता बंद करने और एक साल तक नई भर्तियों पर रोक लगाने की घोषणा की घोर निन्दा की है। संघ ने सरकार से अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार कर वापस लेने की मांग की है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि सरकार द्वारा कोरोना योद्धाओं सरकारी कर्मचारियों के ऊपर निरंतरता में किए जा रहे आर्थिक हमलों से ऐसा लगता है कि सरकार ने उनके हौसलों को तोड़ने का पक्का इरादा बना लिया है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा एकतरफा व तानाशाही पूर्ण तरीके से किए जा रहे हमलों से कोरोना के खिलाफ निडरता के साथ जंग लड़ रहे और आवश्यक सेवाओं को अबाधित रूप से चलाने वाले योद्धाओं के मनोबल पर निश्चित तौर पर प्रभाव पड़ेगा और कोविड 19 के खिलाफ लड़ी जा रही जंग भी कमजोर पड़ सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कोरोना योद्धाओं पर निरंतर आर्थिक हमले करके उनको आंदोलन के लिए मजबूर कर रही है। उन्होंने बताया की कर्मचारियों ने स्वेच्छा से अपने वेतन से 100 करोड़ से ज्यादा हरियाणा कोरोना रिलीफ फंड में दान दिया है और दिन रात कोरोना से जुझ रहे हैं। इसके बावजूद सरकार ने कर्मचारियों का ही ढेड साल के लिए महंगाई भत्ता रोक दिया है ओर आज एलटीसी पर अनिश्चितकालीन के लिए रोक लगा दी है। जिसको लेकर कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।
प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री ने बताया कि सरकार अति धनी पांच प्रतिशत लोगों पर मामूली कर लगाकर आर्थिक संकट में सभी आवश्यक संसाधन जुटा सकती है । लेकिन सरकार ऐसा करने की बजाय कर्मचारियों को निशाना बना रही है। जो निंदनीय है। उन्होंने बताया कि ऑक्सफैम की रिपोर्ट के अनुसार देश के 63 अरबपतियों की संपत्ति 2018 -19 के केन्द्रीय आम बजट जो कि 24,42,200 करोड़ है, से भी ज्यादा है। उन्होंने बताया कि ऊपर के केवल 10 प्रतिशत लोग 77 प्रतिशत धन दौलत के मालिक हैं और ऊपर के केवल 1 प्रतिशत अमीर लोगों के पास नीचे के 70 प्रतिशत लोगों से 4 गुना से ज्यादा संपत्ति है । उन्होंने बताया कि यह धन दौलत इन धन कुबेरों ने सरकार की जनविरोधी नवउदारवादी आर्थिक नीतियों के कारण ही हासिल की है। उन्होंने बताया कि सरकार ने एक साल तक भर्ती बंद करके बेरोजगार युवाओं के रोजगार पाने के अवसरों को समाप्त करने का काम किया है। इस निर्णय से एक तरफ जहां वर्तमान में तैनात कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा और दुसरी तरफ कर्मचारी जनता को बेहतर जन सेवाएं नहीं दे पाएंगे। क्योंकि प्रदेश की जनसंख्या व बढ़े हुए वर्क लोड के अनुसार करीब 5 लाख पद रिक्त पड़े हुए हैं।

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