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कोरोना काल में भी वर्ल्डरीडर कर रही है बच्चों की पढ़ाई में
मदद
-भारत तनेजा-
नई दिल्ली, 30 अप्रैल, 2020
जब पूरी दुनिया में महामारी
कोरोना ने तबाही मचा रखी है उस समय बच्चों की पढ़ाई को ले कर अंतर्राष्ट्रीय
एन.जी.ओ. वर्ल्डरीडर मोबाइल फोन पर कीप चिल्ड्रन रीडिंग के माध्यम से डिजिटल
संसाधन उपलब्ध करा रही है। कोई भी माता-पिता लॉकडाउन के इस समय में भारत और अन्य
कई देषों में बच्चों को कई तरह की शैक्षिक गतिविधियों में पारंगत कर सकते हैं।
गूगल प्लेस्टोर पर वर्ल्डरीडर के बुकस्मार्ट ऐप के जरिए या मोबाइल के ब्राउज़र पर bebooksmart.com पर जा कर इसे डाउनलोड किया जा सकता है।
कोविड-19 महामारी के
कारण पूरी दुनिया में 150 करोड़
से अधिक बच्चे प्रभावित हुए हैं। भारत में इससे 30 करोड़ स्कूली बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर असर पड़ रहा है और
इनमें उन छोटे बच्चों की संख्या काफी अधिक है जो नर्सरी से ग्रेड 2 तक की
कक्षाओं में हैं। ऐसी आशंका व्यक्त की जा रही है कि वे मूलभूत भाषा को समझने और कौशल
निर्माण में पिछड़ सकते हैं।
वर्ल्डरीडर के ग्लोबल
एग्ज़ीक्यूटिव मेम्बर एवं भारत के बोर्ड डायरेक्टर, भानु पोट्टा का कहना है कि घर में उपलब्ध सीमित संसाधनों व
उपकरणों से उन बच्चों को शिक्षा सुलभ कराई जा सकती है। इस बारे में वर्ल्डरीडर
विभिन्न हितधारकों जैसे शिक्षा विभाग,
स्कूल नेटवर्क, दूरसंचार
कम्पनियों से ले कर गैर सरकारी संगठनों का सहयोग कर रहा है ताकि बुकस्मार्ट ऐप के
जरिये सैंकड़ों डिजिटल किताबें उपलब्ध कराई जा सकें।
उल्लेखनीय है कि भारत में 65 करोड़ से
अधिक इंटरनेट उपभोक्ता हैं और इनमें कम आय वाले बेसिक इंटरनेट से जुड़े अभिभावक भी
शामिल हैं जिन्हें ये किताबें उपलब्ध कराई जा सकती हैं। यह ऐप नर्सरी और प्राइमरी शिक्षा
के विद्यार्थियों को एक चुनींदा लाइब्रेरी उपलब्ध कराता है जिसमें बच्चों की
स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय किताबें आसानी से उपलब्ध हैं। सीमित डेटा होने पर भी
इन्हें आसानी से डाउनलोड कर के पढ़ा जा सकता है।
वर्ल्डरीडर की चीफ इम्पैक्ट
ऑफिसर रेबेका चांडलर लैगी के अनुसार महामारी के दौरान सीखने की प्रक्रिया के
नुक्सान को कम करने के लिए बच्चों का किताबों के साथ जुड़ाव बढ़ाया जाना चाहिए। इससे
स्कूल बंद होने से होने वाली हानि को काफी कम किया जा सकता है।

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