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फरीदाबाद। फरीदाबाद के इकलोते सरकारी अस्पताल बी के अस्पताल में मरीजों को आपातकाल में दी जाने वाली दवाएं तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे मे कैसे गरीब मरीजो की जान बचेगी, यह एक बडा सवाल है। अस्प्ताल के प्रबंधन से लेकर सीएमओ तक सभी चुप्प है और मरीज बेसहारा व निरास है। सरकारी अस्पताल में कुत्तो के काटने के कारण लगने वाले टीके एक माह से नदारद है, यहां तक आम प्रयोग में आने वाले टेटनेस और एंटी स्नेक टीके भी ओपीडी तो क्या एमरजंसी में भी नहीं है। मरीज और एमरजंसी में आने वाले लोग डाक्टरों से जब इनके प्रयोग की बता बात करते है तो डाक्टर हाथ खडा कर देते है कि उनके पास इस समय ऐसी कोई दवा नहीं है, जिससे मरीजों को तुरन्त और प्राथमिक उपचार तक दिया जा सकें। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार कितना भी स्वास्थय सेवाओं को सुधारने का दावा कर लें, लेकिन वे सुधरने वाली नहीं है। तेज तर्रार मंत्री अनिल विज एक तरफ तो लोगों से गंदगी के ढेर और लापरवाही की फोटों उन्हे भेजने की बात करते है और दूसरी तरफ सरकारी अस्प्तालों में जरूरी दवाओं व इंजैक्सनों का अभाव है। जिसके चलते आम तौर मरीजों के परिजनों और डाक्टरों में तकरार भी होती रहती है। लेकिन डाक्टर बेचारे क्या करें। जब प्रबंधन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा हुआ है। दस हजार तक कर दवाएं खरीदने का अधिकारी सीएमओं स्तर पर होता है, लेकिन सीएमओ तो नेताओं की चापलूसी और अपने सेवानिवृति का ही दिन गिनने मे लगा हुआ है। ऐसे में गरीब लोग अपने ईलाज के लिए जांए तो कहां, यह एक विचारणीय प्रश्न है ------?

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