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फरीदाबाद: शहर के कई विभागों के अधिकारी अब भी बहुत कामचोर हैं। जनता की समस्या उन तक पहुंचाने के बाद भी कोई समस्या दूर नहीं होती। ये कहना है बार एसोशिएशन के पूर्व प्रधान एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट एलएन पाराशर का जिहिने बताया कि शुक्रवार सुबह में अपने घर तिगांव से अदालत की तरफ जा रहा था तब मैंने देखा कि सेक्टर 7 के कुछ लोग बायपास रोड नहर के किनारे बोतल में पानी लेकर जा रहे हैं। वो शौंच के लिए जा रहे थे जिसके बाद मैं सेक्टर-7,10 मार्केट पहुंचा और देखा कि वो शौंचालय अब भी बंद हैं जिनके बारे में कई महीने पहले मैंने सूचना दी थी कि इनमे ताला लगा पड़ा है। पाराशर ने बताय कि शौंचालय में ताला लगा होने से यहाँ के सैकड़ों दुकानदारों के साथ-साथ मार्केट में आने वाले लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
पाराशर ने बताया कि दुकानदार लगभग चार साल से ये समस्या झेल रहे हैं। उस समय दुकानदारों ने आवाज उठाई तो यहाँ शौंचालय की व्यवस्था नगर निगम की तरफ से की गई लेकिन बहुत जल्द उन पर ताला लग गया जो अब तक लगा है। दुकानदार मजबूरी में खुले में शौंच जाने पर मजबूर हैं।
पाराशर ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत फरीदाबाद को खुले में शौच मुक्त दिखने के लिए नगर निगम प्रशासन और स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने सरकारी धन का अंधाधुंध इस्तेमाल किया। निगम प्रशासन ने वर्ष 2016 में 330 शौचालय 4500 रुपये प्रति यूनिट प्रतिमाह किराए पर किराए पर लिए थे। इनमें से अधिकतर शौचालय बंद हो गए हैं या इस्तेमाल योग्य नहीं रहते। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के नाम पर बहुत पैसे आये लेकिन अधिकारी शायद डकार गए तभी ऐसा हो रहा है।

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