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फरीदाबाद। जिसे गाली दे-देकर चुनाव जीता आज कुछ दलबदलू नेता उसी की गोद में जा बैठे है। सत्ता के हसीन सपने पालने वाले इन नेताओं को उस जनता से भी अब कोई सरोकार नहीं है, जिसने उन्हे सत्ता के खिलाफ जनमत देकर विजय रथ पर चढ़ाया था। ऐसे स्वार्थी नेता यह भूल जाते है कि उन्हे फिर से उसी जनता के बीच जाना होगा, जिनके सपनों को वे आज उसी को बेच रहे है, जिसने उन्हे केवल कोरे सपने दिखायें थे। कांग्रेस हो या फिर कोई अन्य दल या फिर निर्दलीय ही क्यों न हो, सभी को सरकार के खिलाफ जनादेश मिला था। लेकिन आज अधिकांश नेता उसी जनादेश का अनादर करके केवल सत्ता पिपासा को शांत करने के लिए उसी दल की चौखट चूम रहे है। जिसने कभी उन्हे दुत्कार दिया था। वैसे हरियाणा में आया राम, गया राम की राजनीति कोई नयी नहीं है। लेकिन त्रिकंशु विधानसभा की स्थिति में ऐसे नेताओं की बन आती है, जो जीतकर तो दूसरे मुद्दों पर आते है और सत्ता के लिए उनके खिलाफ ही चले जाते है। ऐसे बलबदलू नेता एक बार तो सत्ता का स्वाद चख सकते है, लेकिन कहते है न कि कांठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती, इसी कहावत के अनुसार आगे उनका व उनके दलों का हश्र भी अच्छा नहीं होता है।

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