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गरीब रोजगार की तलाश में जहां- तहां भटकता है - शैलेन्द्र सिंह

Posted by : pramod goyal on : Tuesday, 18 December 2018 0 comments
pramod goyal
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गरीब रोजगार की तलाश में जहां- तहां भटकता है । मारा -मारा फिरता है । कम मजूरी में हाडतौड़ मेहनत के लिए तैयार हो जाता है । बेहद गरीबी और परिवार की भुखमरी के हालात में ही कोई अपना गांव घर छोड़ने को मजबूर होता है । सरकारों ने जो नीतियां बनाई और मशीनरी को बढ़ावा दिया उससे आदमी के लिए रोजगार कम होते चले गए । 
राजीव गांधी ने कम्प्यूटरीकरण को देश में लाकर गरीब -मजदूर -किसान के सामने तबाही खड़ी कर दी । बेरोजगारी की बाढ़ आ गई देश में । कमलनाथ जैसा पूंजीपति नेता गरीबों - मजदूरों को लेकर कैसी नीतियां बनाएगा, 
आसानी से समझा जा सकता है। जब सरकार ही कानून बनाने का काम कर दे तो फिर गरीब से नफरत करने वालों के हौसले कितने बढ़ सकते हैं, यह सहज ही समझाजा सकता है ।
मध्यप्रदेश में 70 '/, रोजगार स्थानीय लोगों के लिए नियम एक खतरनाक कदम है । मध्यप्रदेश के लोग भी तो दूसरे प्रदेशों में रोजगार के अवसर तलाशते हैं ? लोगों को  कमलनाथ जैसे नेताओं और कांग्रेस - बीजेपी जैसी पार्टियों को गहराई से जानने और समझने की जरूरत है ।

 शैलेन्द्र सिंह 
संयुक्त आंदोलन 
फरीदाबाद 

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