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सरकार द्वारा की गई नोटबंदी के 80 दिनों बाद भी लोगों के सामने नकदी की
परेशानी बरकरार है। उन्हे न तो बैंकों से ही निर्धारित केश मिल पा रहा है
और न एटीएम से पैसे निकल रहे है। लम्बी लाइन में लगने के बाद जब पैसें
निकालने का नम्बर आता है तो उन्हे बैंक कर्मी एक ही जबाव देते है कि केश
समाप्त हो गया है या फिर पीछे से ही पैसा नहीं आया है। बैंकों के सामने लगे
कई लोगों ने आरोप लगाया कि बैंक कर्मी केवल अपने चहेतों को ही सरकार
द्वारा निर्धारित की गई नकदी निकासी की सीमा के अनुरूप पैसा देते है, जबकि
वे अपनी जरूरतों के लिए भी पैसा नहीं निकाल पा रहे है।
ओबीसी बैंक बल्लभगढ साखा के सामने लगे ये सभी लोग बैंक व एटीएम से पैसा निकालने आए है। लेकिन उन्हे न तो एटीएम से पैसा मिल पा रहा है और न ही बैंक से। जब भी वे बैंक कर्मियों से पैसे की बावत बात करते है तो उन्हे केवल एक ही रटा रटाया जबाव मिलता है कि केश समाप्त हो गया है। इन लोगों का कहना है कि आखिर आरबीआई से आने वाला पैसा कहा जा रहा है, जब उन्हे पैसा नहीं मिल रहा है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हे तीन-तीन सप्ताह बाद का टोकन पैसा निकालने के लिए दिया जाता है। लेकिन फिर भी पैसा नहीं मिलता है। बैंक कर्मी टोकन को बेच रहे है। इतने दिन बाद भी वे अपने ही पैसे निकालने के लिए भटक रहे है और इधर-उधर से उधार लेकर काम चला रहे है। सरकार नकदी की कोई कमी न होने की बात करती है, जबकि बैंक कर्मी ही सरकार के आदेशों के धज्ज्यिा उडा रहे है और धरातल पर आज भी नकदी निकासी की समस्या जस कि तस बनी हुई है।
ओबीसी बैंक बल्लभगढ साखा के सामने लगे ये सभी लोग बैंक व एटीएम से पैसा निकालने आए है। लेकिन उन्हे न तो एटीएम से पैसा मिल पा रहा है और न ही बैंक से। जब भी वे बैंक कर्मियों से पैसे की बावत बात करते है तो उन्हे केवल एक ही रटा रटाया जबाव मिलता है कि केश समाप्त हो गया है। इन लोगों का कहना है कि आखिर आरबीआई से आने वाला पैसा कहा जा रहा है, जब उन्हे पैसा नहीं मिल रहा है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हे तीन-तीन सप्ताह बाद का टोकन पैसा निकालने के लिए दिया जाता है। लेकिन फिर भी पैसा नहीं मिलता है। बैंक कर्मी टोकन को बेच रहे है। इतने दिन बाद भी वे अपने ही पैसे निकालने के लिए भटक रहे है और इधर-उधर से उधार लेकर काम चला रहे है। सरकार नकदी की कोई कमी न होने की बात करती है, जबकि बैंक कर्मी ही सरकार के आदेशों के धज्ज्यिा उडा रहे है और धरातल पर आज भी नकदी निकासी की समस्या जस कि तस बनी हुई है।

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