//# Adsense Code Here #//
आज कल ग्रामीण क्षेत्रों के युवा अलग-अलग फिल्डों में अपना खास मुकाम बना
रहे है। अगर कोई युवा लक्ष्य बनाकर मेहनत करें तो सफलता जरूर मिलती है। ऐसा
ही एक उदाहरण पैश किया है फरीदाबाद के गांव गांव मोहना के रहने वाले वीर
कौशिक ने। गांव को छोडकर एक्टर बनने का सपना सजाए बनने पंहुचे वीर कौशिक ने
वहां पर काफी संघर्ष किया और उनका संघर्ष रंग लाया। मुम्बई ट्रेक के नाम
से बनी फिल्म से वीर कौशिक रूपहले पर्दे पर हीरों के तौर पर आ रहे है।
साधारण ब्राहमण परिवार से संबंध रखने वाले वीर कौशिक के पिता पं हरी ओम एक कथा वाचक है। अपने एक्टिंग से जुडने का अनुभव सांझा करते हुए वीर कौशिक बताते है कि वे डीएवी कालेज से बीसीए कर रहे थे, इसी दौरान व कालेज में होने वाले नाटकों व एक्टिंग व डांस के कार्यक्रमों में बढ़-चढं कर भाग लेते थे। उन्हे एक्टिंग करने में काफी मजा आता था। उन्होने सौच लिया था कि अब एक्टिंग में ही अपना कैरियर बनाना है। एक्टर बनने के लिए वह गांव से मुम्बई आ गए। मुम्बई में उसने राजपूत इंटरनेशनल ग्लेमरवल्र्ड इंस्टीट्यूट से एक्टिंग का एक साल का कोर्स किया। एक्टिंग का कोर्स करने के बाद उसने वन टेक क्रियेटीशयन प्रोडेक्शन हाऊस की फिल्म मुम्बई ट्रेक के लिए ओडिशन दिया। उन्हे फिल्म में हीरो के तौर पर सिलेक्ट कर लिया गया। मुम्बई टे्रक फिल्म में अपने किरदार के बारे में बताते है कि उनके किरदार का नाम चंदन है, जो रेलवे ट्रेक के आस-पास बनी झोपडपट्टी में रहता है। शुरू में वह बुरा आदमी होता है, लेकिन एक घटना के बाद उसके अंदर की बुराईयां समाप्त हो जाती है और वह अच्छा आदमी बन जाता है। इस फिल्म की कहानी काफी अच्छी है और उन्हे पूरी उम्मीद है कि यह फिल्म दर्शकों को जरूर पंसद आयेगी। इस फिल्म के साथ वह एक रियलटी शो, आओं गाएं, नाच के दिखायें को होस्ट कर रहे है। यह शो जेरीकॉन इंटरनेशनल फिल्म द्वारा बनाया गया है।
वीर कौशिक ने बताया कि शुरू में घर वालों का उन्हे सहयोग नहीं मिला था, लेकिन बाद में उनकी जिद के आगे घरवालों को झुकना पडा और घर वालों ने उनका सहयोग किया। जो लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जी-जान से कोशिश करते है, सफलता उन्हे जरूर मिलती है।
साधारण ब्राहमण परिवार से संबंध रखने वाले वीर कौशिक के पिता पं हरी ओम एक कथा वाचक है। अपने एक्टिंग से जुडने का अनुभव सांझा करते हुए वीर कौशिक बताते है कि वे डीएवी कालेज से बीसीए कर रहे थे, इसी दौरान व कालेज में होने वाले नाटकों व एक्टिंग व डांस के कार्यक्रमों में बढ़-चढं कर भाग लेते थे। उन्हे एक्टिंग करने में काफी मजा आता था। उन्होने सौच लिया था कि अब एक्टिंग में ही अपना कैरियर बनाना है। एक्टर बनने के लिए वह गांव से मुम्बई आ गए। मुम्बई में उसने राजपूत इंटरनेशनल ग्लेमरवल्र्ड इंस्टीट्यूट से एक्टिंग का एक साल का कोर्स किया। एक्टिंग का कोर्स करने के बाद उसने वन टेक क्रियेटीशयन प्रोडेक्शन हाऊस की फिल्म मुम्बई ट्रेक के लिए ओडिशन दिया। उन्हे फिल्म में हीरो के तौर पर सिलेक्ट कर लिया गया। मुम्बई टे्रक फिल्म में अपने किरदार के बारे में बताते है कि उनके किरदार का नाम चंदन है, जो रेलवे ट्रेक के आस-पास बनी झोपडपट्टी में रहता है। शुरू में वह बुरा आदमी होता है, लेकिन एक घटना के बाद उसके अंदर की बुराईयां समाप्त हो जाती है और वह अच्छा आदमी बन जाता है। इस फिल्म की कहानी काफी अच्छी है और उन्हे पूरी उम्मीद है कि यह फिल्म दर्शकों को जरूर पंसद आयेगी। इस फिल्म के साथ वह एक रियलटी शो, आओं गाएं, नाच के दिखायें को होस्ट कर रहे है। यह शो जेरीकॉन इंटरनेशनल फिल्म द्वारा बनाया गया है।
वीर कौशिक ने बताया कि शुरू में घर वालों का उन्हे सहयोग नहीं मिला था, लेकिन बाद में उनकी जिद के आगे घरवालों को झुकना पडा और घर वालों ने उनका सहयोग किया। जो लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जी-जान से कोशिश करते है, सफलता उन्हे जरूर मिलती है।

No comments :