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मृतक पीटीआई के आश्रितों को मिलने वाली मासिक वित्तीय सहायता बंद करने के फैसले को शर्मनाक बताया

Posted by : pramod goyal on : Saturday, 4 July 2020 0 comments
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फरीदाबाद,4 जुलाई। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने मृतक पीटीआई के आश्रितों को मिलने वाली मासिक वित्तीय सहायता बंद करने के फैसले को शर्मनाक व अमानवीयता की परिकाष्ठा करार दिया है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव हरियाणा सरकार को पत्र लिखकर मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत हस्तक्षेप करने और निदेशक मौलिक शिक्षा हरिया
णा, पंचकूला के आदेशों को वापस लेने की मांग की है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि निदेशक, मौलिक शिक्षा हरियाणा पंचकूला ने 27 मई,2020 को सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर मृतक पीटीआई के आश्रितों को मिलने वाली मासिक वित्तीय सहायता बंद करने के आदेश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि निदेशक के आदेश मिलते ही जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों ने खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर मासिक वित्तीय सहायता बंद करने के आदेश दिए हैं और आखिरकार खंड शिक्षा अधिकारियों ने यह साहयता बंद कर दी है। जिसके कारण 2010-11 से 2019 के बीच अकाल मृत्यु का शिकार हुए करीब 35 पीटीआई के आश्रितों के सामने भारी आर्थिक संकट पैदा हो गया है। क्योंकि मृतक आश्रित के परिवार में अब कोई कमाने वाला नहीं है और विभाग ने मिलने वाली मासिक वित्तीय सहायता रोक दी है। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने से बर्खास्त 1983 पीटीआई अपनी सेवाएं बहाली की मांग को लेकर भीषण गर्मी में सड़कों पर धक्के खा रहे हैं और सभी विधायकों व मंत्रियों से मिल चुके हैं। लेकिन सरकार इनकी सेवा बहाली करने के विकल्पों पर गंभीरता से गौर करने की बजाय सेवा के दौरान स्वर्ग सिधार गए पीटीआई के आश्रितों की मासिक वित्तीय सहायता बंद कर जले पर नमक छिड़कने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को कर्मचारी चयन आयोग के पूर्व चेयरमैन व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ-साथ बर्खास्त पीटीआई की सेवाएं बहाल करने के सभी विकल्पों पर गंभीरता से गौर करने की भी धोषणा करनी चाहिए थी। पूर्व चेयरमैन व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से बर्खास्त पीटीआई का गुस्सा शांत नहीं होगा।
 सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि निदेशक ने सभी मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा है कि विज्ञापन संख्या 6/2006 केटेगरी नंबर 23 के अंतर्गत 2010-2011 में चयनित / प्रतिक्षा सूची में नियुक्त हुए पीटीआई और इनमें से पदोन्नत हुए डीपीआई / टीजीटी अध्यापक / अध्यापिकाओं की मृत्यु उपरांत मासिक वित्तीय सहायता बारे में कहा है कि ऐसे किसी भी कर्मचारी की मृत्यु जिसकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले सिविल अपील नंबर 2103 आफ 2020 दिनांक 8.4.2020 की अनुपालना में सेवाएं निरस्त की गई हो,हुई है, यदि ऐसे किसी कर्मचारी के आश्रितों को मासिक वित्तीय सहायता दी जा रही है तो तुरंत प्रभाव से रोक दी जाए। उल्लेखनीय है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के उपरोक्त आदेशों के बाद 1983 पीटीआई को 2-3 अप्रैल को बर्खास्त कर दिया है। इस मामले में राज्य चौकसी ब्यूरो ने तत्कालीन कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष व अन्य के खिलाफ 1 जुलाई को एफआईआर भी दर्ज की है।

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