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अगर बिजली का निजीकरण हुआ तो बिजली की दरों में भारी बढ़ोतरी होगी - सुभाष लांबा

Posted by : pramod goyal on : Saturday, 30 May 2020 0 comments
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फरीदाबाद, 30 मई। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि अगर बिजली का निजीकरण हुआ तो बिजली की दरों में भारी बढ़ोतरी होगी। सब्सिडी व क्रास सब्सिडी खत्म हो जाएगी और बिजली किसानों व घरेलू उपभोक्ताओं की पहुंच से बाहर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं व कर्मचारी विरोधी बिजली निजीकरण संशोधन बिल 2020 के खिलाफ 1 जून को काला दिवस म
नाएंगे। उन्होंने यह आह्वान शनिवार को सेक्टर-7 में जिला कार्यालय में आयोजित आल हरियाणा पावर कारपोरेशनज वर्कर यूनियन की एनआईटी यूनिट कार्यकारिणी की मीटिंग में बोलते हुए किया। यूनिट प्रधान भूपसिंह कौशिक की अध्यक्षता में आयोजित इस मीटिंग में यूनिट एवं सब यूनिटों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। यूनिट सचिव गिरीश राजपूत द्वारा संचालित इस मीटिंग में 1 जून को बिजली कर्मचारी काली पट्टी / काले बिल्ले लगाकर सर्कल की सभी सब डिवीजन स्तर पर काले बिल्ले लगाकर प्रर्दशन करने का फैसला लिया गया है। मीटिंग में सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा व सर्कल सचिव अशोक कुमार मौजूद थे। मीटिंग में सभी सब डिवीजनों में यूनिट कमेटी के पदाधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई। मीटिंग में सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के आह्वान पर 4 जून को ब्लाक व जिला मुख्यालय पर होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का निर्णय लिया गया।

सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष एवं आल हरियाणा पावर कारपोरेशनज वर्कर यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष  सुभाष लांबा ने मीटिंग में बोलते हुए कहा कि केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बिजली वितरण के निजीकरण की घोषणा में कहा गया है कि नई टैरिफ नीति में सब्सिडी व क्रास सब्सिडी समाप्त कर दी जाएगी और किसी को भी लागत से कम मूल्य पर बिजली नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी किसानों, गरीबी रेखा के नीचे और 500 यूनिट प्रति माह बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं को सब्सिडी मिलती है, जिसके चलते इन उपभोक्ताओं को लागत से कम मूल्य पर बिजली मिल रही है। अब नई नीति और निजीकरण के बाद सब्सिडी समाप्त होने से स्वाभाविक तौर पर इन उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी होगी। उन्होंने आँकड़े देते हुए बताया कि बिजली की लागत का राष्ट्रीय औसत रुपए  6.73 प्रति यूनिट है और निजी कंपनी द्वारा एक्ट के अनुसार कम से कम 16 प्रतिशत मुनाफा लेने के बाद रु.8 प्रति यूनिट से कम दर पर बिजली किसी को नहीं मिलेगी। इस प्रकार एक किसान को लगभग 6000 रु. प्रति माह और घरेलू उपभोक्ताओं को 6000 से 8000 रु. प्रति माह तक बिजली बिल देना होगा। उन्होंने कहा कि निजी वितरण कंपनियों को कोई घाटा न हो इसीलिये सब्सिडी समाप्त कर प्रीपेड मीटर लगाए जाने की योजना लाई जा रही है। अभी सरकारी कंपनी घाटा उठाकर किसानों और उपभोक्ताओं को बिजली देती है। उन्होंने कहाकि सब्सिडी समाप्त होने से किसानों और आम लोगों को भारी नुकसान होगा जबकि क्रास सब्सिडी समाप्त होने से उद्योगों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लाभ होगा।

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