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राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस - जूनियर रेडक्रॉस ने मनाया राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस

Posted by : pramod goyal on : Saturday 29 June 2024 0 comments
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 राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के अवसर पर गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सराय ख्वाजा फरीदाबाद में जूनियर रेडक्रॉस, गाइड्स और सैंट जॉन एंबुलेंस ब्रिगेड द्वारा प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा की अध्यक्षता में ऑनलाइन कार्यक्रम में भारतीय सांख्यिकी


के जनक प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने बताया कि राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस को आर्थिक नियोजन और प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस द्वारा किए गए सांख्यिकी के क्षेत्र में विकास और उल्लेखनीय योगदान को सेलिब्रेट करने के लिए मनाया जाता है। राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस को महालनोबिस की जयंती का प्रतीक माना जाता है। जिन्हें भारतीय सांख्यिकी के पिता के रूप में भी जाना जाता है। राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस 2023 का उद्देश्य सतत विकास के लक्ष्यों की निगरानी के लिए राष्ट्रीय संकेतक ढांचे के साथ राज्य संकेतक ढांचे का संरेखण रखा गया है। यह थीम एक साथ कई प्रमुख विषयों को रेखांकित करती है। सतत विकास के लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र के संधारणीय विकास के लिए निर्धारित किए गए हैं देश के प्रसिद्ध सांख्यिकीविद पी सी महालनोबिस को याद करते हुए उनके लक्ष्यों को दैनिक जीवन और योजना के क्षेत्र में विकास की प्रक्रिया के महत्व के बारे सभी को अवगत करा जन जागरूकता पैदा करना है। विद्यालय की जे आर सी, एस जे ए बी अधिकारी एवम प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने बताया कि पीसी महालनोबिस ने देश में सांख्यिकी क्षेत्र में आवश्यक योगदान किया था। जिस से भारत सरकार की नीतियां निर्धारित करने में महत्वपूर्ण सहायता मिली।  कोलकाता से फिजिक्स में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद भौतिकी और गणित में अग्रिम अध्ययन करने के लिए इंग्लैंड चले गए। इंग्लैंड से लौटने के बाद इन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज में पढ़ाया। 1931 में कोलकाता में भारतीय सांख्यिकी संस्थान स्थापित किया गया तथा पी सी महालनोबिस को 1950 में राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण की स्थापना का श्रेय भी दिया जाता है। इस का उद्देश्य सामाजिक आर्थिक डाटा उपलब्ध करना  था। महालनोबिस ने सांख्यिकी गतिविधियों के समन्वय के लिए केंद्रीय सांख्यिकी संगठन की स्थापना की थी। वे 1955 से 1967 तक योजना आयोग के सदस्य भी रहे। भारत की दूसरी पंचवर्षीय योजना महालनोबिस  के गणितीय डिटेल पर आधारित थी जिसे महालनोबिस मॉडल के नाम से जाना गया। प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा और एक्टिविटीज कोऑर्डिनेटर  प्राध्यापिका गीता ने छात्रा आशा, आकांक्षा और एकता का राष्ट्रीय सांख्यिकी के जनक की राष्ट्र के प्रति की गई सेवाओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए आभार और धन्यवाद प्रकट किया।

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