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सरकार ने बर्खास्त पीटीआई को बहाल करने का रास्ता नहीं निकला तो कर्मचारियों के संयुक्त आंदोलन का सामना करना पड़ेगा

Posted by : pramod goyal on : Thursday, 30 July 2020 0 comments
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फरीदाबाद,30 जुलाई। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा ने
कहा कि अगर सरकार ने बर्खास्त पीटीआई को बहाल करने का रास्ता नहीं निकला तो सरकार को सभी विभागों के कर्मचारियों के संयुक्त आंदोलन का सामना करना पड़ेगा। प्रदेशाध्यक्ष लांबा ने यह चेतावनी बृहस्पतिवार को डीसी आफिस पर पिछले 53 दिन से चल रहे बर्खास्त
पीटीआई चल रहे धरने को संबोधित करते हुए दी। शारीरिक शिक्षक संधर्ष समिति के अध्यक्ष संतोष कुमार की अध्यक्षता में आयोजित धरने पर सैकड़ों बर्खास्त पीटीआई व अन्य विभागों के कर्मचारियों ने शिरकत की। उन्होंने सीएम के इस बयान पर सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अध्यादेश नही लाया जा सकता तो बिजली मंत्री की अध्यक्षता में गठित 4 सदस्यीय कमेटी क्या काम करेंगी ? उन्होंने कहा कि सरकार बर्खास्त पीटीआई की सेवाएं बहाली के ठोस विकल्प ढूंढने की बजाय एडवोकेट जनरल व विधि परामर्शी से सलाह करने के नाम पर आंदोलन को लंबा करके पीटने का असफल प्रयास कर रही है। उन्होंने ऐलान किया कि बर्खास्त पीटीआई की बहाली व जन सेवाओं के किए जा रहे निजीकरण के खिलाफ भारत छोड़ो आन्दोलन की 78 वीं वर्षगांठ 9 अगस्त को प्रदेशभर में सत्याग्रह किए जाएंगे। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर शीध्र बर्खास्त निर्दोष पीटीआई की बहाली नही की तो प्रदेश के तमाम कर्मचारी, मजदूर, किसान, छात्र, नौजवान व महिला संगठनों के प्रतिनिधि बैठक कर प्रदेश में बड़ा आन्दोलन करने पर मजबूर होंगे। जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार की हठधर्मिता की होगी। प्रदेशाध्यक्ष लांबा ने 38 मृतक पीटीआई के आश्रितों को मिलने वाली मासिक वित्तीय सहायता बंद करने के फैसले को शर्मनाक एवं संवेदनहीनता की पराकाष्ठा बताया और तूरंत इस फैसले को वापस लेने की मांग सरकार से की। धरने में हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के आडीटर राज सिंह व जिला प्रधान भीम सिंह आदि मौजूद थे।
प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि बर्खास्त किए गए 1983 पीटीआई की सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदेश में चल रहा आंदोलन अब जन आंदोलन बन गया है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को किसानों, मजदूरों, छात्रों, नौजवानों, महिलाओं और कर्मचारियों एवं शिक्षकों के सभी श्रेणी के संगठनों का अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि 1983 बर्खास्त पीटीआई में 67 पीटीआई तो दुसरे विभागों एवं निजी क्षेत्र से अच्छी अच्छी नौकरी से त्यागपत्र दे कर लगे हुए हैं। 25 महिला पीटीआई विधवा हो गई है और 53 एक्स सर्विसमेन है। उन्होंने कहा कि इन दस सालों में 20 पीटीआई रिटायर भी हो चुके हैं और 31 पीटीआई डिसेबल है। उन्होंने कहा कि 1983 पीटीआई में से करीब 80 प्रतिशत बर्खास्त पीटीआई की आयु 45 से 55 के बीच है। उन्होंने कहा कि उम्र के इस पड़ाव में अब बर्खास्त पीटीआई कही कुछ भी न करने की स्थिति में है। उन्होंने ऐलान किया कि कहा जब तक बर्खास्त किए गए 1983 पीटीआई को बहाल नहीं किया जाएगा, राज्य में पीटीआई का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सीएम के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सवाल किया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट का समान काम, समान वेतन देने व एसवाईएल का फैसला अभी तक लागू क्यों नहीं किया गया। उन्होंने सवाल किया कि एक तरफ सरकार बर्खास्त किए पीटीआई की बहाली के लिए कमेटी बनाने की बात कह रही है और दूसरी तरफ सीएम बयान दे रहे की सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अध्यादेश नही लाया जा सकता। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी में जब सभी प्रकार की परीक्षाएं रद्द की जा रही है,उसी समय पीटीआई की भर्ती के लिए 29 जुलाई को टेस्ट लेने का फैसला लिया जा रहा है। सरकार व कर्मचारी चयन आयोग का यह निर्णय अत्यंत खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने कोविड 19 के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए इस टेस्ट को रद्द करने की मांग की है। 

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