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वन अधिकारी की मजदूर विरोधी नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की

Posted by : pramod goyal on : Sunday, 7 June 2020 0 comments
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फरीदाबाद 7 जून वन विभाग मजदूर यूनियन संबंधित सीटू की जिला कमेटी की बैठक रोज गार्डन बाई पास रोड सेक्टर 17 में संपन्न हुई। इसकी अध्यक्षता जिला प्रधान ब्रहम सिंह चंदेला ने की। इस अवसर पर सीटू के जिला प्रधान निरंतर पराशर,जिला
उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह डंगवाल एवं कर्मचारी नेता धर्मवीर वैष्णव विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में जिला वन अधिकारी की मजदूर विरोधी नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की गई। सीटू के जिला उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने जिला वन अधिकारी पर  मजदूरों का शोषण करने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि  डीएफओ का  कार्यालय नियमों के विपरीत काम कर रहा है। पुराने मजदूरों को काम पर नहीं लिया जाता है। उनकी जगह नए मज़दूर लगाए जाते हैं।  नए मजदूरों का ठेकेदार और विभाग के अधिकारी मिलकर शोषण करते   है। उनको श्रम विभाग द्वारा निर्धारित 347 रुपए प्रतिदिन की मजदूरी देने के बजाय केवल ₹290 ही दिए जाते हैं यदि कोई व्यक्ति पूरी मजदूरी देने की बात करता है। तो ठेकेदार उसको अपमानित करते हैं। लेकिन विभाग के अधिकारी    ठेकेदारों पर लगाम नहीं लगाते। उन्होंने बताया यह अजीब विडंबना ही हैं। कि वन विभाग से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी को ही विभाग का ठेका दे दिया गया। इनके पास ठेकेदारी का लाइसेंस भी नहीं है। नियमों के अनुसार 10 वर्ष का निर्माण कार्य के अनुभव रखने वाले व्यक्ति को ही ठेकेदारी दी जा सकती है लेकिन वन विभाग के अधिकारी सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ा कर विभाग को काफी आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 20 वर्षों से जो मजदूर वन विभाग में कार्यरत थे उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। जबकि श्रम कानूनों मैं पुराने कर्मचारियों को काम पर लगाने की वरीयता देने का प्रावधान है लेकिन वन विभाग के अधिकारी इन नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं। इसलिए आज की बैठक में निर्णय लिया गया की जब तक विभाग से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों  से  ठेकेदारों के रूप में काम लेने पर रोक नहीं लगती और पुराने श्रमिकों को काम पर नहीं लगाया है तब तक आंदोलन को जारी  रहेगा। क्योंकि  ऐसे ठेकेदार जिनके पास ठेकेदारी का पर्याप्त अनुभव नहीं है उन्हें तकनीकी ज्ञान कम है  वे किसी भी सूरत में विभाग का काम नहीं ले सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों की जांच पड़ताल होनी चाहिए। जो सेवानिवृत्त के बाद पेंशन भी ले रहे हैं और विभाग में ठेका भी लेते हैं और इस तरह से दोहरे लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई अनिवार्य है। क्योंकि   विभाग को ये  लोग काफी नुकसान पहुंचा रहे है।    डंगवाल ने कहा कि वन विभाग के अधिकारियों ने कोरोना  वायरस की महामारी के चलते  संपूर्ण बंद होने के बाद भी मजदूरों से काम लिया गया।  इन मजदूरों को ठेकेदार  श्री स्वतंत्र कुमार और ज्ञानी ने मास्क , दस्ताने, सेनीटाइजर का सामान भी नहीं दिया।   यह ठेकेदार कानूनों को ताक पर रखकर अपनी मनमर्जी चलाता है। जब सरकार ने सभी विभागों का काम बंद कर रखा है। तो वन विभाग में काम क्यों होने दिया  गया । जबकि सरकार ने सभी ठेकेदारों को लॉक डाउन के दौरान  मजदूरों को वेतन देने के सख्त आदेश दे रखे थे। लेकिन वन विभाग के ठेकेदारों ने मजदूरों से काम ले लिया और पूरा वेतन भी नहीं दिया।  यह सिलसिला अभी भी जारी है ।  इस तरह से इसमें सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान भी नहीं रखा गया था ।  आज की बैठक रोहतास , दलीप, शीला ने भी संबोधित किया।

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