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हरियाणा कोरोना रिलीफ फंड में योगदान देने के लिए कर्मचारियों से परामर्श तथा सहमति ली गई थी

Posted by : pramod goyal on : Thursday, 7 May 2020 0 comments
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फरीदाबाद, 7 मई - जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद ने कुछ समाचार पत्रों में प्रकाशित सर्व कर्मचारी संघ के आरोपों का खण्डन किया है, जिसमें कहा गया है कि विश्ववविद्यालय प्रशासन द्वारा हरियाणा कोरोना रिलीफ फं
ड में योगदान देने के लिए कर्मचारियों की सहमति के बिना उनके वेतन से कटौती की जा रही है जबकि हरियाणा कोरोना रिलीफ फंड में योगदान देने का निर्णय विश्वविद्यालय द्वारा सभी शिक्षण और गैर-शिक्षण विभागों के अधिकारियों के परामर्श से लिया गया था और इस संबंध में कर्मचारियों से अलग से सहमति भी ली गई थी। विश्वविद्यालय कोरोना  महामारी के दौरान राहत गतिविधियों में सहयोग देने वाले सभी कर्मचारियों के एकजुट प्रयासों की सराहना करता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय की अपने कर्मचारियों के वेतन में कटौती करने की कोई मंशा नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि लॉकडाउन अवधि के दौरान सभी कर्मचारियों को वेतन मिले।
हालांकि, कुलपति ने मानवीय आधार पर कर्मचारियों से अपील की है कि वे कोरोन वायरस महामारी से प्रभावित लोगों के लिए राहत कार्यों में स्थानीय प्रशासन और सरकार का समर्थन करें और योगदान दें क्योंकि इस कठिन समय में महामारी से प्रभावित लोगों को यथासंभव सहयोग देना हम सभी की सामाजिक जिम्मेदारी भी है। कुलपति ने अपील में कर्मचारियों से हरियाणा कोरोना रिलीफ फंड में अपनी स्वेच्छा से एक दिन का वेतन देने का आग्रह किया है जो अनिवार्य नहीं है। विश्वविद्यालय द्वारा कभी भी किसी कर्मचारी के वेतन से उसकी सहमति के बिना कटौती नहीं की जायेगी। 
विश्वविद्यालय ने आगे स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर विश्वविद्यालय गंभीर है। विश्वविद्यालय समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा जारी निर्देशों की अनुपालन में महामारी से कर्मचारियों को सुरक्षित रखने के लिए सभी आवश्यक एहतियाती कदम उठा रहा है। विश्वविद्यालय ऐसे कर्मचारियों के समर्पण और सहयोग की सराहना करता है जो इस महामारी से उत्पन्न संकट के दौरान जरूरी सेवाओं को जारी रखने के लिए निरंतर रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
राज्य सरकार के निर्देशों की अनुपालन करते हुए विश्वविद्यालय ने 4 मई, 2020 से सभी कार्यालयों को ग्रुप-ए एवं बी के अधिकारियों की शतप्रतिशत उपस्थिति और ग्रुप-सी एवं डी के कर्मचारियों की 33 प्रतिशत उपस्थिति के साथ पुनः खोलने का निर्णय लिया है तथा कार्यस्थल पर सामाजिक दूरी, स्वच्छता तथा सेनिटाइजेशन को सुनिश्चित किया गया है। हालाँकि, विश्वविद्यालय द्वारा टीचिंग-लर्निंग गतिविधियां डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन मोड में जारी रहेंगी और स्थिति सामान्य होने तक विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस संबंध में, शैक्षणिक गतिविधियों के सुचारू रूप से संचालित के लिए शिक्षण विभागों के अध्यक्षों को आवश्यकता अनुसार शिक्षण स्टाफ को बुलाने के लिए अधिकृत किया गया है।

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